AMRITA SAYS 🖊..🇮🇳 AZADI KA AMRIT MAHOTSAV 🇮🇳
अपडेट करने की तारीख: 2 अग॰ 2022
स्वतंत्रता की गूंज 15 अगस्त,
हमारी गुलामी के दिन हो गये है अस्त,
हो सफ़र शुरू वही से,
रास्ता मिले जब कहि से,
प्रश्ना बस उठता ही रहा,
की गुलाम हो तुम, जब गुलाम कहा,
करते रहे अपनों से बैर,
खोल दिया अपनों का भेद,
अब यु ही तो उठाया फायदा,
तब कुछ काम न आया नियम कायदा,
कर संघर्ष जब किया सामना,
मन में गाँठ थी नही हारना,
बस ध्येय को लिए चले,
टूटे ख्वाब पुनः बूने,
इसी तरह संघर्ष बढ़ता रहा,
सफलता की सीढ़ी आगे चढ़ता रहा,
माँ तेरा दर्द वो सहता रहा,
वन्दे मातरम वन्दे मातरम कहता रहा,
कांटों का सफर तय था,
लडखडा न जाये बस भय था,
एकता से स्तम्भ निर्माण कर,
भारत का इतिहास बदलने का समय था,
आ गयी थी वो घड़ी ,
जब रंग लाई सबकी मेहनत कड़ी,
यु ही न मिली थी आज़ादी जमीन पर पड़ी,
थी लक्ष्मी बाई अपनी जिद्द पर अड़ी.....
AMRITA SAYS.....🇮🇳🖊


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